Wednesday, August 26, 2026

नर्सरी/LKG/UKG प्रवेश को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करे राज्य सरकार: विकास तिवारी

हाईकोर्ट में दिए गए आश्वासन का अब तक पालन नहीं
रायपुर।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं WPPIL No. 22 of 2016 में Applicant-in-Person विकास तिवारी ने आज स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ कमल प्रीत को एक विस्तृत प्री-लिटिगेशन प्रतिवेदन प्रस्तुत कर नर्सरी, एलकेजी एवं यूकेजी प्रवेश सत्र 2026–27 की वर्तमान वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
उन्होंने प्रतिवेदन में कहा है कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष हलफनामा प्रस्तुत कर प्री-प्राइमरी/फाउंडेशनल स्टेज शिक्षा के लिए नई गाइडलाइन जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन नया शैक्षणिक सत्र2026-27 प्रारंभ होने के बाद भी आज तक कोई नई गाइडलाइन, अधिसूचना या नीति जारी नहीं की गई है। इससे पूरे प्रदेश में अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं शैक्षणिक संस्थाओं के बीच कानूनी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बिना मान्यता संचालित प्ले स्कूल लाखों रुपया प्रति छात्र फीस वसूल रहे है जो फीस नियामक 2020 का उल्लंघन है।
उन्होंने इसका भी उल्लेख किया है कि राज्य सरकार के आधिकारिक RTE पोर्टल पर आज भी 3 से 6½ वर्ष आयु के बच्चों को प्रवेश स्तर की कक्षा में पात्र बताया जा रहा है तथा योजना का लाभ नर्सरी से कक्षा 12वीं तक प्रदर्शित किया जा रहा है। दूसरी ओर नई वैधानिक व्यवस्था स्पष्ट नहीं किए जाने से विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
तिवारी ने राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में प्रस्तुत 109 बिना मान्यता वाले विद्यालयों की सूची का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें कृष्णा किड्स अकादमी की कई शाखाएँ भी शामिल हैं। इसके बावजूद ऐसे संस्थानों द्वारा प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश जारी रहने से गंभीर कानूनी प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं। प्रतिवेदन में सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि ऐसे संस्थान वर्तमान में किस वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं, क्या वे मान्यता प्राप्त हैं, उनका नियामक विभाग कौन है तथा क्या उन्हें सत्र 2026–27 में प्रवेश देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने अनुरोध किया है कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय में दिए गए अपने आश्वासन का पालन करते हुए शीघ्र नई गाइडलाइन जारी करे तथा 109 बिना मान्यता वाले संस्थानों की वर्तमान कानूनी स्थिति सार्वजनिक करे। यदि उचित समय में विभाग द्वारा स्पष्ट उत्तर या आवश्यक वैधानिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया जाता है, तो यह प्रतिवेदन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में लंबित जनहित याचिका में प्रस्तुत कर आवश्यक निर्देश प्राप्त किए जाएंगे।

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