Monday, July 20, 2026

श्रीजगन्नाथ प्रभु के सामने छतरी, तलवार, मुकुट पहनकर नहीं जाया जा सकता: कुमार जयदेव

जगदलपुर। रियासत कालीन सुकमा जमींदार परिवर के वरिष्ठ सदस्य कुमार जयदेव अपनी रियासत कालीन परंपरा अनुसार बस्तर के स्थानीय मुरिया समाज, धाकड़ समाज, एवं आरण्यक व उत्कल समाज के प्रतिनिधियों के साथ बस्तर गोंचा महापर्व में सोमवार को शामिल होकर भगवान श्रीजगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी की पूजा अर्चना कर बस्तर की सुख समृद्धि शांति के लिए की कामना करते हुए सबके कल्याण की मंगलकामना की।
इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ जगत के नाथ है, उनके सामने कोई राजा है न कोई मुख्यमंत्री है ना कोई प्रधानमंत्री है, वे जगत के पालनहार है। अब रही बात बड़े-छोटे की भगवान श्रीजगन्नाथ प्रभु के सामने छतरी, तलवार, मुकुट पहनकर नहीं जाया जा सकता लेकिन यहां चल रहा है इसे दुनिया देख रही है और समझती है। भगवान के पास सभी याचक के रूप में आते हैं। जिसका निर्वहन हमारे पूर्वजों से लेकर हमारे द्वारा आज भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में प्रजातंत्र है, यहां राजा-महाराजा, जमींदार वाली बात नहीं है। बस्तर की परंपराओं में बस्तरीयों की भागीदारी सुनिश्चित होना चाहिए।
उन्होने कहा कि बस्तर की रियासत कालीन परंपराओं का निर्वहन दृढता के साथ किया जाना आवश्यक है, इसमें तनिक भी बदलाव बस्तर की समृद्ध विरासत को खंडित करने का काम करती है। जिसका दुष्परिणाम देखने को मिलता है, बस्तर के लोग इसे जानते-समझते है। बस्तर का अस्तित्व बस्तर की गौरवशाली बस्तर दशहरा हो या बस्तर गोंचा सहित पूरे बस्तर संभाग के हमारी आराध्य देवी-देवताओं से जुड़े हुए तमाम पर्व त्यौहार की परंपरा ही पूरे विश्व में बस्तर को एक अलग स्थान में स्थापित करती है। जिसे बनाये रखना हम सबका कर्तव्य है।
कुमार जयदेव ने कहा कि सभी जगह श्रीजगन्नाथ का पर्व मनाया जाता है, लेकिन बस्तर की रियासत कालीन परंपरा अनुसार यहां के मंदिर शासन के अधीन होने के कारण बस्तर गोंचा महापर्व की परंपराओं के निर्वहन की जिम्मेदारी प्रशासन की है। उन्होंने कहा कि बस्तर गोंचा महापर्व की परंपरा में यदि कुछ गलत होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पहली बार बस्तर गोंचा महापर्व के श्रीगोंचा रथयात्रा पूजा विधान के दौरान प्रशासन की मौजूदगी में समाज के लोगों के सामने जहां राज परिवार के सदस्य कमल बाबा भी मौजूद थे, सबके सामने एक दुर्घटना हो गया। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ लोगों का भी कहना है कि ऐसे कैसे हो गया, यदि किसी की मृत्यु हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने कहा कि बस्तर की रियासत कालीन परंपराओं से मैं जुड़ा हुआ हूं पहली बार हुए इस दुघर्टना से भगवान श्रीजगन्नाथ कुछ संकेत दिए हैं, ऐसा बस्तर के स्थानिय लोगों का भी मानना है। उन्होने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर की विरासत एवं बस्तर की परंपराओं से बस्तर के आदिवासियों को हम जितना दूर करेंगे हमारी परंपराएं हमारी मान्यताएं हमसे उतना दूर होते जाएगी। जिसका दुष्परिणाम आज हमको बस्तर दशहरा एवं बस्तर गोंचा की परंपराओं में देखने को मिलने लगा है।

आप की राय

How Is My Site?
Latest news
Related news