Friday, August 28, 2026

तेल संकट, केंद्र सरकार ने लगाया विंडफॉल टैक्स

नई दिल्ली। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद भारतीय तेल कंपनियों ने भी 15 मई से पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। अब सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक और बड़ा फैसला लिया है। देर रात सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर विंडफॉल गेन टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लिया। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की दरें एक बार फिर बदल दी हैं।
अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम $120 प्रति बैरल से ऊपर चले गए थे। उस वक्त सरकार ने डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 55.5 रुपये और ATF पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी थी।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के साथ युद्ध के बाद सबसे ज्यादा चर्चा तेल की हो रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल गेन टैक्स में बदलाव किया है। रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को जीरो कर दिया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की दरें एक बार फिर बदल दी हैं। इसको लेकर 15 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर दी गई है।
विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर होता है, जो कंपनियों को अचानक बढ़े अंतरराष्ट्रीय दामों से होने वाले अतिरिक्त मुनाफे पर लगाया जाता है।

ये नई दरें 16 मई 2026 से लागू होंगी। पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगी। डीजल पर यह दर 16.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल विमान ईंधन पर 16 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। तीनों मामलों में रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शून्य है।

सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, यानी देश में आम उपभोक्ताओं को फिलहाल पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में किसी बदलाव का सामना नहीं करना होगा। बदली गई दरे केवल निर्यात किए जाने वाले तेलों पर आज से लागू हो गई हैं। यहां ये समझना जरूरी है कि सरकार की ओर से विंडफॉल टैक्स बढ़ाने का मकसद घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। इससे पहले यह कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अत्यधिक फायदा उठाने से रोकना बताया जा रहा है।

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