Friday, August 14, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पिछड़ा वर्ग आयोग नहीं दे सकता रिकवरी का आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग केवल सलाहकार और सिफारिश करने वाली संस्था है तथा उसे किसी वाणिज्यिक (कमर्शियल) विवाद में धन की वसूली (रिकवरी) का आदेश देने का अधिकार नहीं है। यह मामला कमला मोटर्स द्वारा ₹21 लाख में हार्वेस्टर बेचने के सौदे से जुड़ा था, जिसमें खरीदार ने ₹30,000 अग्रिम राशि दी थी। बैंक फाइनेंस और COVID-19 महामारी के कारण सौदा समय पर पूरा नहीं हो सका। बाद में खरीदार ने सौदा रद्द कर आयोग में शिकायत की, जिस पर आयोग ने 23 सितंबर 2022 के आदेश में कलेक्टर को कमला मोटर्स से ₹1,26,500 वसूलकर खरीदार को भुगतान कराने का निर्देश दिया। इस आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 की धारा 9 के अनुसार आयोग की भूमिका केवल जांच, सलाह और सिफारिश तक सीमित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के उद्देश्य से आयोग को सिविल कोर्ट जैसी कुछ शक्तियां मिलने से वह सिविल कोर्ट नहीं बन जाता और न ही उसे धन-वसूली जैसे न्यायिक आदेश जारी करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है। इसलिए आयोग द्वारा ₹1,26,500 की रिकवरी का निर्देश उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था और उसे कानूनन टिकाऊ नहीं माना जा सकता।

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