Sunday, August 30, 2026

मोहला-मानपुर के तेंदूपत्ता संग्राहकों को 30 करोड़ से अधिक का भुगतान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल इलाकों में तेंदूपत्ता और बांस को हरा सोना माना जाता है। राज्य सरकारों द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा करने से लाखों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें आत्मनिर्भरता मिली है। तेंदूपत्ता संग्रहण से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है। तेंदूपत्ता संग्रहण अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है। शासन द्वारा समय पर भुगतान और बोनस राशि मिलने से ग्रामीणों का भरोसा और बढ़ा है।
छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के घने वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक वनोपज नहीं, बल्कि हरा सोना बनकर आर्थिक संबल का मजबूत आधार बना है। हर वर्ष गर्मी के मौसम में हजारों ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, तेंदूपत्ता संग्रहण के कार्य से जुड़कर अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण से प्राप्त राशि का उपयोग ग्रामीण परिवार बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और खेती-किसानी के कार्यों में कर रहे हैं। इस तरह तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
37 हजार 131 संग्राहक परिवारों को मिला 30 करोड़ 65 लाख रुपए से अधिक का भुगतान
वर्ष 2026 में जिले की 39 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के अंतर्गत 40 लॉट और 502 फड़ों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण किया गया। मई माह में 37 हजार 131 संग्राहक परिवारों ने कुल 55 हजार 741.7 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया। इसके एवज में संग्राहक परिवारों को 30 करोड़ 65 लाख 79 हजार 350 रुपए का भुगतान किया गया है। इसके अतिरिक्त फरवरी-मार्च 2026 में तेंदूपत्ता बूटा कटाई के लिए भी 40 लाख 51 हजार 154 रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
उत्कृष्ट गुणवत्ता से जिले के तेंदूपत्ते की बढ़ी पहचान
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का तेंदूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इसकी गुणवत्ता के कारण जिले के तेंदूपत्ता लॉट की मांग बनी रहती है और इन्हें ठेकेदारों द्वारा अच्छी दर पर खरीदा जाता है। वर्ष 2023 के तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जिले की 36 समितियों के 33 हजार 363 संग्राहक परिवारों को 11 करोड़ 97 लाख 98 हजार 934 रुपए बोनस राशि के रूप में प्रदान किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।
डीबीटी से पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान
तेंदूपत्ता संग्रहण और बूटा कटाई की राशि का भुगतान ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से किया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के तहत राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। तेंदूपत्ता संग्रहण से मिलने वाली आय ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक संबल बन रही है। वहीं, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

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