Thursday, July 16, 2026

मासूम की चौखट पर पहुँचा प्रशासन, दूर हुई आधार की बाधा

सारंगढ़- बिलाईगढ़। ई-गवर्नेंस का वास्तविक उद्देश्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सुशासन, पारदर्शिता और दक्षता स्थापित करना है। इसका असली मकसद तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल बनाना है, ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम, सशक्त और सुरक्षित बनाया जा सके। सरकारी योजनाएँ जब फाइलों से निकलकर सीधे जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुँचती हैं, तो वह केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की एक खूबसूरत मिसाल बन जाती है। सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिला प्रशासन ने हाल ही में कुछ ऐसी ही संवेदनशीलता दिखाई है, जहाँ तमाम बंदिशों और कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे एक मासूम के घर पहुँचकर उसका आधार कार्ड बनाया गया।
मुश्किल हालात और पहचान का संकट
शासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक ऐसे बच्चे की पहचान की गई थी, जिसकी उम्र 5 वर्ष से अधिक होने के बाद भी उसका आधार नामांकन नहीं हो पाया था। इस मासूम का परिवार अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा था।बच्चे की माता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, और पिता काफी समय पहले परिवार को छोड़कर अलग हो चुके हैं। देखभाल कर रहे परिजनों ने बिलाईगढ़, भटगांव, सरसीवा और सारंगढ़ के कई आधार केंद्रों के चक्कर लगाए, लेकिन विशेष पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे को केंद्र तक ले जाकर प्रक्रिया पूरी कराना मुमकिन नहीं हो पा रहा था।
होम-सर्विस, मिनटों में हुआ समाधान
जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, तो कलेक्टर ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद ई-जिला प्रबंधक (ईडीएम) की टीम तुरंत सक्रिय हुई। निर्देशों का पालन करते हुए आधार ऑपरेटर आवश्यक बायोमेट्रिक उपकरणों के साथ सीधे बच्चे के घर पहुँचे। बिना किसी देरी के बच्चे के घर पर ही संवेदनशीलता के साथ आधार नामांकन की पूरी प्रक्रिया पूर्णत: नि:शुल्क संपन्न की गई। ई-गवर्नेंस (इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस) का अर्थ नागरिकों और व्यवसायों को सरकारी सेवाएं, जानकारी और संचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग करना है। इसका मुख्य उद्देश्य शासन को स्मार्ट (सरल, नैतिक, जवाबदेह, उत्तरदायी और पारदर्शी) बनाना और भ्रष्टाचार को कम करना है।
खुला सरकारी योजनाओं का मार्ग
इस एक दस्तावेज के बन जाने से अब इस मासूम के लिए भविष्य में मिलने वाली सभी सरकारी, सामाजिक और शैक्षणिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने का रास्ता साफ हो गया है। इस संवेनदशील पहल से गद्गद होकर आवेदनकर्ता सुमत राम बंजारे और सुमित्रा कुमारी घृतलहरे ने प्रशासन का सहृदय धन्यवाद किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब हम थक-हार कर बैठ गए थे, तब प्रशासन ने खुद आगे बढ़कर हमारे बच्चे की सुध ली। कलेक्टर साहब, ईडीएम और ऑपरेटर की इस मानवीय पहल को हम कभी नहीं भूलेंगे। यह केवल एक कार्ड नहीं, हमारे बच्चे के सुरक्षित भविष्य की पहचान है। जिला प्रशासन की यह त्वरित और संवेदनशील कार्यशैली यह साबित करती है कि ई-गवर्नेंस का असली मकसद तकनीक के जरिए अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम और सुरक्षित बनाना है।

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