Tuesday, August 25, 2026

कोयलारी कला में निजी भूमि पर चेक डैम, पहली बारिश में दरारें और धंसाव से गुणवत्ता पर सवाल

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कवर्धा। पंडरिया के ग्राम पंचायत कोयलारी कला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 17 लाख रुपये की लागत से निर्मित 12 मीटर लंबे चेक डैम को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। गांव के निवासी येकल सिंह, पिता कृष्ण कुमार सिंह ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पंडरिया को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि चेक डैम का निर्माण उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 902/1 (904, 905), रकबा 3.15 एकड़, सेहामालगी खार में कराया गया है। शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य को तत्काल निरस्त करने, मौके का भौतिक सत्यापन कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस चेक डैम में निर्माण के दौरान गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। उनका कहना है कि निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद चेक डैम में कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। इतना ही नहीं, बरसात शुरू होते ही पहली ही बारिश के पानी में निर्माण का हिस्सा धंसने लगा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अभी से यह स्थिति है तो आगे तेज बारिश के दौरान चेक डैम के टिके रहने पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में निजी स्वामित्व की है, तो वहां सरकारी राशि से निर्माण कार्य की स्वीकृति किस आधार पर दी गई। क्या संबंधित उपयंत्री ने निर्माण से पहले स्थल का भौतिक सत्यापन किया था? क्या भूमि के राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया था? यदि सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था तो निजी भूमि पर सरकारी निर्माण कैसे हो गया, और यदि नहीं किया गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि खसरा नंबर 902/1 (904, 905) का राजस्व अभिलेखों के आधार पर तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए। और संबंधित सरपंच, उपयंत्री , तकनीकी अमले एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए और सरकारी राशि के उपयोग की भी विस्तृत जांच कराई जाए। यह मामला अब केवल एक चेक डैम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मनरेगा कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें जनपद पंचायत और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर लाखों रुपये की लागत से बने इस निर्माण पर उठे सवाल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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