मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निपटान से जुड़े मामले में गुरुवार को सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने सरकार को 900 मीट्रिक टन राख की आकलन रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं, जो जहरीले कचरे के विनष्टीकरण के बाद एकत्र हुई है। इसके साथ ही कोर्ट ने भोपाल गैस मेमोरियल के निर्माण को लेकर विस्तृत कार्ययोजना भी प्रस्तुत करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है। यह मामला मूल रूप से 2024 में भोपाल निवासी आलोक प्रताप सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें जहरीले कचरे के सुरक्षित निपटान की मांग की गई थी, हालांकि बाद में याचिकाकर्ता के निधन के बाद इसे संज्ञान याचिका के रूप में आगे बढ़ाया गया। राज्य सरकार की रिपोर्ट में बताया गया था कि कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में किया जा चुका है, जिससे लगभग 900 मीट्रिक टन राख और अवशेष प्राप्त हुए हैं। वहीं, एक अन्य याचिका में इस राख में रेडियो-एक्टिव पदार्थों की मौजूदगी पर चिंता जताई गई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने 500 मीटर के दायरे में लैंडफिलिंग स्थान तय करने पर रोक लगा दी थी।
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